Thursday, 26 March 2015

अजीब मोड़ है ये....

समझाए कोई, बहलाए कोई
अजीब मोड़ है ये
अपने अपने न हो सके
साथ निभा रहा है कोई।


समझा था मैंने जिसे अपना
अजीब मोड़ है ये
अपनापन जता बैठी मैं
जबकि था वो एक सपना।


मैं चली आई थी रिश्ते निभाने
अजीब मोड़ है ये
हो गये अपने दूर मुझसे
और अनजान लग गए पास आने।


मौसम बदले, इंसान बदले
अजीब मोड़ है ये
बस फरक इतना था
सभी के रास्ते बदले।


अकेली खड़ी हूँ इस मोड़ पर
अजीब मोड़ है ये
बड़ी भीड़ से हटकर
खड़ी हूँ तनहाई के भरोसे पर।


आर्ची अरोरा












Saturday, 7 March 2015

मैं चाहती हूँ

पंछी सामान्य उड़ना चाहती हूँ,
करना चाहती हूँ महसूस आसमान को,
उसकी गहराई का अर्थ निकलना चाहती हूँ।
फूल की तरह महकना चाहती हूँ,
चाहती हूँ खिलना संसार में,
क्योंकि मैं खुशियाँ फैलाना चाहती हूँ।
इंदीरा गाँधी जैसे बनना चाहती हूँ,
चाहती हूँ अपनी आवाज़ उठाना,
क्योंकि में देश को बदलना चाहती हूँ।
राधा-रानी सी मधुरता ग्रहण चाहती हूँ,
चाहती हूँ शीतल होना,
क्योंकि मैं मन से सुंदर होना चाहती हूँ।
औरत बनने का गौरव करना चाहती हूँ,
चाहती हूँ रसोईघर से बाहर निकलना,
तथा पुरुषों के समान चलना चाहती हूँ।


आर्ची अरोरा






Thursday, 5 March 2015

§ometimes..

Sometimes i forgot to listen you,
as in your voice let me in your dreams!
Sometimes i pampered you,
as in your habits made me smile!
Sometimes i made you sad,
as in your sad face made me feel your importance!
Sometimes i talked more & more,
as in your thoughts inspired me!
Sometimes you weren't with me,
as in your smile won't left me ever alone!
Sometimes i couldn't gave you time,
as in my every breath is connected to you!
Sometimes i felt your absence,
as in your presence made me crazy in your love!
Sometimes & Sometimes i accepted your mistakes,
as in my soul is incomplete without you!
Sometimes i missed you very much,
as in i loved you every day, every hour & every single second of my life!


ARCHIE ARORA

Tuesday, 3 March 2015

।।इंसान।।

इंसान हर मोड़ पर जाने से डरता है,पर हर कदम पर खुद को बदलता है।।




इंसान दुख का समय याद हर पल रखता है,
लेकिन दुख के समय में काम आने वालों को भूल जाता है।।




इंसान पैसे को काफी महत्व देता है,
तभी तो इंसान इंसानों को ही तोलता है।।




इंसान खुद से ही बेईमानी करता है,
फिर भी वह समझता है कि वह दुनिया से ईमानदार है।।


इंसान अपने आप के अलावा किसी का न हो सका,
मगर आशा यह करता है पूरी दुनिया उसकी हो सके।।


इंसान दुनिया के बंधनों में बंद गया है,
तब भी वह हर मोड़ पर अकेला ही है।।






आर्ची अरोरा