समझाए कोई, बहलाए कोई
अजीब मोड़ है ये
अपने अपने न हो सके
साथ निभा रहा है कोई।
समझा था मैंने जिसे अपना
अजीब मोड़ है ये
अपनापन जता बैठी मैं
जबकि था वो एक सपना।
मैं चली आई थी रिश्ते निभाने
अजीब मोड़ है ये
हो गये अपने दूर मुझसे
और अनजान लग गए पास आने।
मौसम बदले, इंसान बदले
अजीब मोड़ है ये
बस फरक इतना था
सभी के रास्ते बदले।
अकेली खड़ी हूँ इस मोड़ पर
अजीब मोड़ है ये
बड़ी भीड़ से हटकर
खड़ी हूँ तनहाई के भरोसे पर।
आर्ची अरोरा
अजीब मोड़ है ये
अपने अपने न हो सके
साथ निभा रहा है कोई।
समझा था मैंने जिसे अपना
अजीब मोड़ है ये
अपनापन जता बैठी मैं
जबकि था वो एक सपना।
मैं चली आई थी रिश्ते निभाने
अजीब मोड़ है ये
हो गये अपने दूर मुझसे
और अनजान लग गए पास आने।
मौसम बदले, इंसान बदले
अजीब मोड़ है ये
बस फरक इतना था
सभी के रास्ते बदले।
अकेली खड़ी हूँ इस मोड़ पर
अजीब मोड़ है ये
बड़ी भीड़ से हटकर
खड़ी हूँ तनहाई के भरोसे पर।
आर्ची अरोरा