Saturday, 7 March 2015

मैं चाहती हूँ

पंछी सामान्य उड़ना चाहती हूँ,
करना चाहती हूँ महसूस आसमान को,
उसकी गहराई का अर्थ निकलना चाहती हूँ।
फूल की तरह महकना चाहती हूँ,
चाहती हूँ खिलना संसार में,
क्योंकि मैं खुशियाँ फैलाना चाहती हूँ।
इंदीरा गाँधी जैसे बनना चाहती हूँ,
चाहती हूँ अपनी आवाज़ उठाना,
क्योंकि में देश को बदलना चाहती हूँ।
राधा-रानी सी मधुरता ग्रहण चाहती हूँ,
चाहती हूँ शीतल होना,
क्योंकि मैं मन से सुंदर होना चाहती हूँ।
औरत बनने का गौरव करना चाहती हूँ,
चाहती हूँ रसोईघर से बाहर निकलना,
तथा पुरुषों के समान चलना चाहती हूँ।


आर्ची अरोरा






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