इंसान हर मोड़ पर जाने से डरता है,पर हर कदम पर खुद को बदलता है।।
इंसान दुख का समय याद हर पल रखता है,
लेकिन दुख के समय में काम आने वालों को भूल जाता है।।
इंसान पैसे को काफी महत्व देता है,
तभी तो इंसान इंसानों को ही तोलता है।।
इंसान खुद से ही बेईमानी करता है,
फिर भी वह समझता है कि वह दुनिया से ईमानदार है।।
इंसान अपने आप के अलावा किसी का न हो सका,
मगर आशा यह करता है पूरी दुनिया उसकी हो सके।।
इंसान दुनिया के बंधनों में बंद गया है,
तब भी वह हर मोड़ पर अकेला ही है।।
आर्ची अरोरा
इंसान दुख का समय याद हर पल रखता है,
लेकिन दुख के समय में काम आने वालों को भूल जाता है।।
इंसान पैसे को काफी महत्व देता है,
तभी तो इंसान इंसानों को ही तोलता है।।
इंसान खुद से ही बेईमानी करता है,
फिर भी वह समझता है कि वह दुनिया से ईमानदार है।।
इंसान अपने आप के अलावा किसी का न हो सका,
मगर आशा यह करता है पूरी दुनिया उसकी हो सके।।
इंसान दुनिया के बंधनों में बंद गया है,
तब भी वह हर मोड़ पर अकेला ही है।।
आर्ची अरोरा
No comments:
Post a Comment